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Hatyari Laparwahi

Yaad rakhen ye aapradhik laaparwahi.. Is video ko zaroor dekhen aur bhavishya me kabhi bhi bhaavnaon me bahkar vote na karen.. Apni pahli hi sarkaar me Atal ne pension band kar di thi.. Aisi party ki sarkaar dubara aai ye hamari galti hai. Aisi galti dubara na ho iske liye hame hi saavdhan rahna hoga..
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गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई

गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई :  बहुत पुरानी बात है १९७१ के आम चुनाव की। इंदिरा गांधी की लहर थी और आज की भाजपा का…
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उद्यमी नहीं, बिचौलिए या दलाल कहें

उद्यमी अपने संसाधनों से यूनिट लगाता है और उसमें से तयशुदा बिजली सरकार को कम दाम पर वंचित तबके के लिए देता है। बची बिजली वह मार्केट प्राइस पर बेचने को स्वतंत्र…
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इस दुर्दशा का अंत नहीं

बोर्ड के एग्जाम शुरू हो चुके हैं। पहले ही दिन हिन्दी का पर्चा करीब दो लाख लड़के लड़कियों ने नहीं दिया। आजकल आकाशगामी बातों पर ज़ोर ज्यादा है सो ज़मीनी बातों पर लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते। और फिर बात हिन्दी की हो तो ये मान लिया जाता है कि यह भाषा तो बनी ही दुर्दशा के लिए है और यह सोच कर बात भुला दी जाती है। लेकिन यह संकेत गम्भीर है और इशारा कर रहा…
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प्रेम के लिए एक दिन ही क्यूँ!

प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है ना कोई स्वार्थ ना ही कोई लालच, न ही पाने की खुशी न ही खोने का डर! प्रेम कोई लक्ष्य तो नहीं जिसे पाना एकदम से जरूरी हो प्रेम तो…
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पढ़े-लिखे लोगों के अपराध

आज कल कोई भी अखबार उठा कर देखें आपको साइबर क्राइम की तमाम ख़बरें देखने को मिलेंगी लेकिन उनमें से कितनों में जांच पूरी होकर अभियुक्त पकड़े गए ये बात डीटेल में नहीं…
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साइट चलाने की बारी अब आपकी

भाइयों यह साइट आपके लिए ही बनाई गयी है। देखने से लग रहा है की अब यह ठीक-ठाक पढ़ी जा रही है। इसलिए अब साइट का दूसरा चरण शुरू करना है। यह काम आपको करना है। आपके इलाके में बहुत कुछ ऐसा होगा जो आप चाहते होंगे की और लोग भी जानें, लेकिन जान नहीं पाते। उसे लिखकर हमारे पास मेल आईडी munna12345anand@gmail.com पर भेज दीजिये। सबजेक्ट में ‘गोल्डेन टॉक में प्रकाशन के लिए’ लिखना न भूलें। उसे इस साइट पर प्रकाशित करने की ज़िम्मेदारी हमारी। इस संबंध में आप जो भी जानकारी चाहें मुझसे मोबाइल नंबर +91-7521924486 पर ले सकते हैं। गुज़ारिश है इस साइट से गंभीरता से जुड़ें। यकीन जानिए कालांतर में समाज को, आप को और हमको लाभ ही होगा।
धन्यवाद

अनेहस शाश्वत
About Me

Anehas Shashwat

स्वतंत्रता मिले आधी शताब्दी से ज़्यादा हुए। इस अवधि में देश लोकतंत्र से भीड़तन्त्र की ओर जाता दिख रहा है। इसके कारण और निदान की पड़ताल बेहद ज़रूरी है। फ़िलहाल इसी काम का आनन्द लिया जा रहा है...

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