The Golden Talk
by Anehas Shashwat

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Recent Posts

वह मार्मिक दृश्य जिसे मैं भुला नहीं पाता

इस वाकये को गुज़रे अंदाज़न साल भर से ज्यादा तो हो ही चुके होंगे लेकिन आज भी यह जस का तस मुझे याद है। देसी कुत्ते–कुतिया हर जगह बहुतायत से मिलते हैं, जहां मैं रहता हूँ वहां भी काफी हैं। कुछ तीन–चार साल तक दिखाई देते हैं, ज्यादातर जन्म लेने के चार से छह माह के अन्दर ही दुनिया छोड़ जाते हैं, भूख, उपेक्षा, बीमारी और दुर्घटनाएं इसकी वजह होती हैं। हर साल…
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वाजिद अली शाह, बाबरी मस्जिद और आडवाणी

दुनिया में एक से एक रोचक कथाएं हैं, जो कई बार विलुप्त हो जाती हैं लेकिन घूम-फिर कर लोगों के ज़ेहन में फिर से ताज़ा हो जाती हैं। ऐसे ही बाबरी मस्जिद कम से कम दो…
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सिर्फ कोसें नहीं कुछ करें भी हुज़ूर

बात बहुत छोटी सी है और बहुत बड़ी भी, हालांकि छापने वाले पेपर ने इसे छोटी ही समझा। खैर कोई बात नहीं अपना अपना नज़रिया। गाजीपुर के कप्तान हैं डॉ यशवीर सिंह,…
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अपने ही डेथ वारंट पर दस्तखत कर रहा समाज

इसी 3 फरवरी को गोरखपुर में एक घटना घटी और आई गयी हो गयी, एक व्यवसाई ने अपने परिवार को ज़हर देकर मार डाला फिर खुद भी आत्महत्या कर ली। खबर में बताया गया उस पर लाखों रुपये, लगभग दस लाख का क़र्ज़ था और क़र्ज़ देने वाले उसे तंग कर रहे थे, साथ ही उसका व्यवसाय भी घाटे में जा रहा था। प्रथम दृष्ट्या इस घटना में कुछ बातें साफ़ हैं, उसने लोन बाज़ार से लिया होगा…
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महाभारत ज़रूर पढ़ें, दुनिया बेहद आसान लगेगी

महाभारत से जुड़ी इस गर्वोक्ति को मैंने करीब 30 साल पहले, पहली बार सुना था। पढ़ लिख कर बेरोजगार था तब भी पढ़ने-लिखने में ही फ़ालतू समय बिताता था, उसी समय एक सज्जन ने…
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कुम्भ मेला : आस्था पर भारी आह…!!

मेले की व्यवस्था का गहन आकलन करने के बाद मन सरकार व प्रशासन को 10 में 8 नंबर देने को तैयार हो गया। लेकिन इस बीच एक घटना ने मुझे विचलित कर दिया। क्योंकि भीड़भाड़…
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ब्रेकर के ज़रिए ठोकर खाते आप और हम

सत्ता छोटी से छोटी चीज़ में भी चाह ले तो प्रभुता और लघुता का अहसास करा ही देती है। शायद सत्ता का चरित्र ही ऐसा है। सड़कों पर बने स्पीड ब्रेकर जैसे छोटे निर्माण में भी सत्ता की यह प्रवृत्ति झलक ही जाती है। जहाँ प्रभुओं की रिहाइश होती है वहाँ स्पीड ब्रेकर बनते हैं लेकिन लघु मानवों की बस्तियों और उन सड़कों पर जहां वे आमतौर पर चलते हैं, स्पीड ब्रेकर के…
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अनटोल्ड ट्रैजेडी आफ स्ट्रीट डॉग्स…!!

हे देश के नीति-नियंताओं। जिम्मेदार पदों पर आसीन नेताओं व अफसरों ...आप सचमुच महान हो। जनसेवा में आप रात-दिन व्यस्त रहते हैं। इतना ज्यादा कि आप शुगर, ब्लड प्रेशर,…
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इस्तीफा – उर्जित पटेल का, स्वेच्छा या मजबूरी?

यह महज़ एक इत्तेफाक नहीं है कि एक तरफ तो उर्जित पटेल के इस्तीफे और साथ ही दूसरी ओर तीन बड़े राज्यों में जनता द्वारा भी वृहद संख्या में भाजपा के खिलाफ मतदान दोनों…
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डॉक्टरों की मार–पीट की वजह तलाशना बेहद ज़रूरी

किसी भी दिन का अखबार उठा कर देख लीजिये, अक्सर ये पढ़ने को मिल जाएगा कि किसी अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीजों को पीटा या मरीजों ने डॉक्टर को। इस को पढ़कर आपके दिमाग में डॉक्टर्स की बाबत नकारात्मक छवि बननी लाजिमी है, तभी आपके सामने कभी–कभी एक और खबर आयेगी कि काम के बोझ से कम से कम जूनियर डॉक्टर्स की हालत खराब है। रुकिए अभी एक और खबर बची है वो ये कि…
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जान है तो जहान है, ऐसी भी क्या जल्दी

ख़बरें टुकड़ों में आती हैं, इसलिए अक्सर इस ओर ध्यान नहीं जाता कि वे कई बार नई बन रही प्रवृत्तियों की ओर भी इशारा कर रही होती हैं। अभी हाल ही में एक खबर आई कि…
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नित-नए पाठ्यक्रम और ठेके की नौकरियां

अभी थोड़े दिन हुए अखबार में खबर दिखी कि लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अपने यहाँ के तमाम सेल्फ फाइनांस कोर्सेज पढ़ाने बंद कर दिए और जो बचे हैं उनमें से अधिकाँश में पढ़ने के…
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About Me

Anehas Shashwat

स्वतंत्रता मिले आधी शताब्दी से ज़्यादा हुए। इस अवधि में देश लोकतंत्र से भीड़तन्त्र की ओर जाता दिख रहा है। इसके कारण और निदान की पड़ताल बेहद ज़रूरी है। फ़िलहाल इसी काम का आनन्द लिया जा रहा है...

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