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गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई

गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई :  बहुत पुरानी बात है १९७१ के आम चुनाव की। इंदिरा गांधी की लहर थी और आज की भाजपा का…
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उद्यमी नहीं, बिचौलिए या दलाल कहें

उद्यमी अपने संसाधनों से यूनिट लगाता है और उसमें से तयशुदा बिजली सरकार को कम दाम पर वंचित तबके के लिए देता है। बची बिजली वह मार्केट प्राइस पर बेचने को स्वतंत्र होता है। ये है अमेरिकन और यूरोप का पूंजीवाद, लेकिन अपने देश की सरकारें और बिचौलिए ऐसा असली पूंजीवाद पसंद नहीं करते। उन्हें बीच की दलाली वाला पूंजीवाद का भारतीय संस्करण ज्यादा पसंद है...
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इस दुर्दशा का अंत नहीं

बोर्ड के एग्जाम शुरू हो चुके हैं। पहले ही दिन हिन्दी का पर्चा करीब दो लाख लड़के लड़कियों ने नहीं दिया। आजकल आकाशगामी बातों पर ज़ोर ज्यादा है सो ज़मीनी बातों पर…
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प्रेम के लिए एक दिन ही क्यूँ!

प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है ना कोई स्वार्थ ना ही कोई लालच, न ही पाने की खुशी न ही खोने का डर! प्रेम कोई लक्ष्य तो नहीं जिसे पाना एकदम से जरूरी हो प्रेम तो…
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पढ़े-लिखे लोगों के अपराध

आज कल कोई भी अखबार उठा कर देखें आपको साइबर क्राइम की तमाम ख़बरें देखने को मिलेंगी लेकिन उनमें से कितनों में जांच पूरी होकर अभियुक्त पकड़े गए ये बात डीटेल में नहीं बताई जाती। हम–आप भी इन्हें सरसरी निगाह से देखकर भूल जाते हैं, लेकिन थोड़ा ठहर कर सोचिये तो ये समाज में नयी और निरंतर बढ़ रही प्रवृत्ति की ओर इशारा कर रही हैं...
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हर किसी को हर बार मूर्ख बनाना असम्भव

कहावत है कि किसी व्यक्ति को मूर्ख बनाना सम्भव है, कुछ लोगों को कई बार मूर्ख बनाना सम्भव है लेकिन हर किसी को हर बार मूर्ख बनाना असम्भव है। छोटी सी कहावत है सो…
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समझ में नहीं आतीं ये उलटबासियाँ

पिछले करीब दो दशक से देश की माली हालत ख़ासतौर से चर्चा का विषय होती है। इसमें कम से कम दो बातें साफ़-साफ़ समझ में आती हैं, एक तो साफ़ सुथरी अंग्रेज़ी में धीरे-धीरे…
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साइट चलाने की बारी अब आपकी

भाइयों यह साइट आपके लिए ही बनाई गयी है। देखने से लग रहा है की अब यह ठीक-ठाक पढ़ी जा रही है। इसलिए अब साइट का दूसरा चरण शुरू करना है। यह काम आपको करना है। आपके इलाके में बहुत कुछ ऐसा होगा जो आप चाहते होंगे की और लोग भी जानें, लेकिन जान नहीं पाते। उसे लिखकर हमारे पास मेल आईडी munna12345anand@gmail.com पर भेज दीजिये। सबजेक्ट में ‘गोल्डेन टॉक में प्रकाशन के लिए’ लिखना न भूलें। उसे इस साइट पर प्रकाशित करने की ज़िम्मेदारी हमारी। इस संबंध में आप जो भी जानकारी चाहें मुझसे मोबाइल नंबर +91-7521924486 पर ले सकते हैं। गुज़ारिश है इस साइट से गंभीरता से जुड़ें। यकीन जानिए कालांतर में समाज को, आप को और हमको लाभ ही होगा।
धन्यवाद

अनेहस शाश्वत
About Me

Anehas Shashwat

स्वतंत्रता मिले आधी शताब्दी से ज़्यादा हुए। इस अवधि में देश लोकतंत्र से भीड़तन्त्र की ओर जाता दिख रहा है। इसके कारण और निदान की पड़ताल बेहद ज़रूरी है। फ़िलहाल इसी काम का आनन्द लिया जा रहा है...

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