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भक्तों के भगवान : भूत, भविष्य और वर्तमान

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भक्तों के भगवान : भूत, भविष्य और वर्तमान 

भक्तों के भगवान ने नोटबंदी और जीएसटी से न सिर्फ अर्थव्यवस्था का बाजा बजाया बल्कि स्विडिश बैंक में रखे काले धन को वापस लाने के लिए भी कुछ नहीं किया। 15 लाख को जुमला कह दिया गया। दूसरी ओर, कानून लागू करने की आड़ में शेल कंपनियां और एनजीओ बंद करवाए गए। टाटा समूह को अपने कई ट्रस्ट बंद करने पड़े। ये सब समाज सेवा का ही काम करते थे। अब सरकार का निशाना विदेशी चंदा लेने वाले एनजीओ हैं। न जाने क्यों, आदेश है कि सबका खाता एसबीआई, दिल्ली में होना चाहिए। अव्वल तो विदेशी पैसा देश में आने से कोई नुकसान नहीं है और सरकार को इसे प्रेरित करना चाहिए। पहले किया भी जाता था। वैसे भी पैसा बैंकों में सरकारी नियमानुसार और जानकारी में ही आता है। फिर आज के डिजिटल जमाने में खाता दिल्ली में ही होना क्यों जरूरी है, राम जानें।
मुझे लगता है कि सरकार को डर है कि ऐसे लोग उसका विरोध करते हैं। अगर इनमें कोई विरोध पर उतर आय तो उसे नियंत्रित करने के लिए आय के स्रोत बंद करना सरकार के लिए संभव नहीं होता है। इसलिए इन्हें तरह-तरह से कसा जा रहा है। मेरा मानना है कि इस सरकार ने ऐसे तमाम उपाय किए हैं जिससे छोटा मोटा काम करके स्वतंत्र जीवन जीने वाले लोगों को बेरोजगार किया जा सके और वे सरकार का विरोध नहीं कर सकें। दूसरी ओर, इतने विरोध के बावजूद सरकार अगर निश्चिन्त है तो इसका एक कारण यह हो सकता है कि सरकार जानती है कि ऐसे विरोधी ज्यादा समय तक नहीं टिकेंगे।
मैं पहले लिख चुका हूं कि अखबारों की खबरों के अनुसार, इस सरकार के कार्यकाल में 14800 एनजीओ बंद हुए, 5.43 लाख कथित शेल कंपनियां बंद हुईं, 27 सरकारी बैंकों को घटा कर 12 कर दिया गया, कम से कम दो बैंकों के ग्राहक लुट गए, कम से कम 31 बैंक डीफॉल्टर अरबों रुपए लेकर भाग गए (2018 की स्थिति), 6.8 लाख कंपनियां बंद हुई हैं, 10 हजार फर्मों ने स्वेच्छा से परिचालन बंद कर दिया हैं। क्या आपको लगता है कि सरकार इन्हें चालू करने या इनके बदले कुछ करने की सोच रही है या कर पाएगी जिससे पुरानी स्थिति बहाल हो। या आप मानते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा? वह भी तब जब पीएम केयर्स खोलकर सीएसआर का पैसा भी भी चूस लिया गया है। कहा भले जा रहा है लाशें गंगा में पहले भी बहती थीं लेकिन ऐसी स्थिति यूं ही नहीं आई होगी।

Founder (company) at Anuvaad Communication

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