The Golden Talk
by Anehas Shashwat

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पुरखों के पाप और पुण्य दोनों के ही फल उनकी संतानों को भोगने पड़ते हैं, यह बात पारिवारिक सन्दर्भ में तो सही है ही वृहत्तर सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी सही प्रतीत हो रही है। आज की तारीख में उभर कर आये संविदाकर्मियों के खासे बड़े वर्ग की दास्तान को इस कसौटी पर कस कर आसानी से समझा जा सकता है। पुरखों के पाप…
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