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एक सजावटी मंत्री की उदास मृत्यु

आमतौर पर मैं ऐसे विषयों पर नहीं लिखता, लेकिन कभी-कभी नियम तोड़ना चाहिए। अपने यहाँ परंपरा है, मृत्यु के बाद किसी की कमियों या दुष्टता पर चर्चा नहीं की जाती। उसके बारे में सब कुछ अच्छा-अच्छा ही बोलने का रिवाज़ है। लेकिन पश्चिमी सभ्यता में ऐसा…

लोहियाजी के सिद्धांतों की सद्गति

कुदरत का निजाम भी अजीब है, कोई चीज़ कितनी भी सुन्दर क्यों न हो कालान्तर में कुरूप हो जाती है। कुछ इसी तरह से ये भी है कि सिद्धान्त ज़्यादातर लोगों के कल्याण के लिए बेहतरीन बनाए जाते हैं लेकिन लागू होने के क्रम में वे बद से बदतरीन होते जाते…

पुरखों का पाप भोगते लाचार संविदाकर्मी

पुरखों के पाप और पुण्य दोनों के ही फल उनकी संतानों को भोगने पड़ते हैं, यह बात पारिवारिक सन्दर्भ में तो सही है ही वृहत्तर सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी सही प्रतीत हो रही है। आज की तारीख में उभर कर आये संविदाकर्मियों के खासे बड़े वर्ग की दास्तान…

प्रभु दर्शन और निरीह कांस्टेबल की मौत

एक ही दिन दो ख़बरों पर ध्यान गया, पहली 28 जुलाई को दस बड़े औद्योगिक घरानों के प्रभु, प्रदेश के लोगों को लखनऊ में दर्शन देकर कृतार्थ करेंगे। उन देव दुर्लभ क्षणों में यह बताया जाएगा कि सामान्य जन के कष्ट दूर करने के लिए कितने लाख करोड़ रुपयों का…

चिनार के पेड़ और जहाँगीर

बहुत पहले पढ़ा था कि सम्राट जहांगीर को कश्मीर बेहद पसंद था इस हद तक कि उन्होंने कश्मीर को पृथ्वी का स्वर्ग बताया था बावजूद इसके जहांगीर ने स्वर्ग की शोभा को निखारने के लिए दो महत्वपूर्ण काम किये। चिनार के पेड़ तब भी कश्मीर में थे लेकिन सम्राट…

वह मार्मिक दृश्य जिसे मैं भुला नहीं पाता

इस वाकये को गुज़रे अंदाज़न साल भर से ज्यादा तो हो ही चुके होंगे लेकिन आज भी यह जस का तस मुझे याद है। देसी कुत्ते–कुतिया हर जगह बहुतायत से मिलते हैं, जहां मैं रहता हूँ वहां भी काफी हैं। कुछ तीन–चार साल तक दिखाई देते हैं, ज्यादातर जन्म लेने के…

वाजिद अली शाह, बाबरी मस्जिद और आडवाणी

दुनिया में एक से एक रोचक कथाएं हैं, जो कई बार विलुप्त हो जाती हैं लेकिन घूम-फिर कर लोगों के ज़ेहन में फिर से ताज़ा हो जाती हैं। ऐसे ही बाबरी मस्जिद कम से कम दो बार सत्ता-संधान का कारण बनी। फर्क बस इतना रहा कि पहली बार यह ढहाई नहीं जा सकी…

सिर्फ कोसें नहीं कुछ करें भी हुज़ूर

बात बहुत छोटी सी है और बहुत बड़ी भी, हालांकि छापने वाले पेपर ने इसे छोटी ही समझा। खैर कोई बात नहीं अपना अपना नज़रिया। गाजीपुर के कप्तान हैं डॉ यशवीर सिंह, उन्होंने अपनी दो साल की बिटिया अम्बावीर का दाखिला स्थानीय आंगनबाड़ी केन्द्र में कराया…

अपने ही डेथ वारंट पर दस्तखत कर रहा समाज

इसी 3 फरवरी को गोरखपुर में एक घटना घटी और आई गयी हो गयी, एक व्यवसाई ने अपने परिवार को ज़हर देकर मार डाला फिर खुद भी आत्महत्या कर ली। खबर में बताया गया उस पर लाखों रुपये, लगभग दस लाख का क़र्ज़ था और क़र्ज़ देने वाले उसे तंग कर रहे थे, साथ ही उसका…

महाभारत ज़रूर पढ़ें, दुनिया बेहद आसान लगेगी

महाभारत से जुड़ी इस गर्वोक्ति को मैंने करीब 30 साल पहले, पहली बार सुना था। पढ़ लिख कर बेरोजगार था तब भी पढ़ने-लिखने में ही फ़ालतू समय बिताता था, उसी समय एक सज्जन ने चर्चा के दौरान इस गर्वोक्ति का ज़िक्र किया। बड़ा कौतूहल हुआ कि क्या ऐसी…