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राजनीति

देश में लोकतंत्र और वंशवाद का अनूठा दौर

अपने देश में लोकतंत्र का फिलहाल जो मॉडल चल रहा है, वो इंग्लैंड और फ्रांस की देन है। हमारे संविधान का मूल ड्राफ्ट इंग्लैंड की देखरेख में 1935 में ही बनने लगा था, जिसे आजादी के बाद पूरा कर 1950 में 26 जनवरी को राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया।…

Hatyari Laparwahi

Yaad rakhen ye aapradhik laaparwahi.. Is video ko zaroor dekhen aur bhavishya me kabhi bhi bhaavnaon me bahkar vote na karen.. Apni pahli hi sarkaar me Atal ne pension band kar di thi.. Aisi party ki sarkaar dubara aai ye hamari…

गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई

गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई गांधी नाम से क्यों चिढ़ते हैं भाजपाई :  बहुत पुरानी बात है १९७१ के आम चुनाव की। इंदिरा गांधी की लहर थी और आज की भाजपा का पूर्वज जनसंघ भी मैदान मे था। चुनाव मे इंदिराजी की खूबियों और खामियों पर बहस के…

उद्यमी नहीं, बिचौलिए या दलाल कहें

उद्यमी अपने संसाधनों से यूनिट लगाता है और उसमें से तयशुदा बिजली सरकार को कम दाम पर वंचित तबके के लिए देता है। बची बिजली वह मार्केट प्राइस पर बेचने को स्वतंत्र होता है। ये है अमेरिकन और यूरोप का पूंजीवाद, लेकिन अपने देश की सरकारें और बिचौलिए…

सुनहु तात, अब पौध कहानी

महाराष्ट्र में पिछले साल 30 करोड़ पौधे सरकार ने लगाए और इस साल 33 करोड़ पौधे लगाने के बाद ही वहां की सरकार विश्राम करेगी। सरकार है जो भी करेगी बड़ा ही करेगी यानी मोटे तौर पर अगर इन दोनों सालों के पौधों को ही गिने तो भविष्य में महाराष्ट्र में…

कहां गई बदजबानी, वो रूठना और वो मनाना

बहुत पुरानी बात नहीं है। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। पूर्णबहुमत की सरकार होने और मुख्यमंत्री के चाचा होने के नाते आली जनाब आजम खान साहेब का जाहोजलाल भी उरूज पर था। ऐसे में रहनुमाए मिल्लत और अव्वल-ए-बदजबानी आली जनाब मोहतरम आजम खान साहेब ने…

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