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समाज

धंधा है, तो गन्दा भी होगा

बहुत पहले मेरे बचपने में दादी ने कोई मनौती मानी थी और वो पूरी हो गयी रही होगी तो पूरा परिवार तीर्थ यात्रा पर गया था| मै काफी छोटा था लेकिन मुझे पूरी तरह याद है वो यात्रा आनंददायक होने के साथ साथ खासी तकलीफदेह भी थी| रुकने के लिए सिर्फ…

लोहियाजी के सिद्धांतों की सद्गति

कुदरत का निजाम भी अजीब है, कोई चीज़ कितनी भी सुन्दर क्यों न हो कालान्तर में कुरूप हो जाती है। कुछ इसी तरह से ये भी है कि सिद्धान्त ज़्यादातर लोगों के कल्याण के लिए बेहतरीन बनाए जाते हैं लेकिन लागू होने के क्रम में वे बद से बदतरीन होते जाते…

पुरखों का पाप भोगते लाचार संविदाकर्मी

पुरखों के पाप और पुण्य दोनों के ही फल उनकी संतानों को भोगने पड़ते हैं, यह बात पारिवारिक सन्दर्भ में तो सही है ही वृहत्तर सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी सही प्रतीत हो रही है। आज की तारीख में उभर कर आये संविदाकर्मियों के खासे बड़े वर्ग की दास्तान…

प्रभु दर्शन और निरीह कांस्टेबल की मौत

एक ही दिन दो ख़बरों पर ध्यान गया, पहली 28 जुलाई को दस बड़े औद्योगिक घरानों के प्रभु, प्रदेश के लोगों को लखनऊ में दर्शन देकर कृतार्थ करेंगे। उन देव दुर्लभ क्षणों में यह बताया जाएगा कि सामान्य जन के कष्ट दूर करने के लिए कितने लाख करोड़ रुपयों का…

चिनार के पेड़ और जहाँगीर

बहुत पहले पढ़ा था कि सम्राट जहांगीर को कश्मीर बेहद पसंद था इस हद तक कि उन्होंने कश्मीर को पृथ्वी का स्वर्ग बताया था बावजूद इसके जहांगीर ने स्वर्ग की शोभा को निखारने के लिए दो महत्वपूर्ण काम किये। चिनार के पेड़ तब भी कश्मीर में थे लेकिन सम्राट…

सिर्फ कोसें नहीं कुछ करें भी हुज़ूर

बात बहुत छोटी सी है और बहुत बड़ी भी, हालांकि छापने वाले पेपर ने इसे छोटी ही समझा। खैर कोई बात नहीं अपना अपना नज़रिया। गाजीपुर के कप्तान हैं डॉ यशवीर सिंह, उन्होंने अपनी दो साल की बिटिया अम्बावीर का दाखिला स्थानीय आंगनबाड़ी केन्द्र में कराया…

अपने ही डेथ वारंट पर दस्तखत कर रहा समाज

इसी 3 फरवरी को गोरखपुर में एक घटना घटी और आई गयी हो गयी, एक व्यवसाई ने अपने परिवार को ज़हर देकर मार डाला फिर खुद भी आत्महत्या कर ली। खबर में बताया गया उस पर लाखों रुपये, लगभग दस लाख का क़र्ज़ था और क़र्ज़ देने वाले उसे तंग कर रहे थे, साथ ही उसका…

महाभारत ज़रूर पढ़ें, दुनिया बेहद आसान लगेगी

महाभारत से जुड़ी इस गर्वोक्ति को मैंने करीब 30 साल पहले, पहली बार सुना था। पढ़ लिख कर बेरोजगार था तब भी पढ़ने-लिखने में ही फ़ालतू समय बिताता था, उसी समय एक सज्जन ने चर्चा के दौरान इस गर्वोक्ति का ज़िक्र किया। बड़ा कौतूहल हुआ कि क्या ऐसी…

कुम्भ मेला : आस्था पर भारी आह…!!

मेले की व्यवस्था का गहन आकलन करने के बाद मन सरकार व प्रशासन को 10 में 8 नंबर देने को तैयार हो गया। लेकिन इस बीच एक घटना ने मुझे विचलित कर दिया। क्योंकि भीड़भाड़ के बीच एक मासूम बच्ची रस्से पर संतुलन कायम करते हुए करतब दिखा रही थी। पास मौजूद…

जान है तो जहान है, ऐसी भी क्या जल्दी

ख़बरें टुकड़ों में आती हैं, इसलिए अक्सर इस ओर ध्यान नहीं जाता कि वे कई बार नई बन रही प्रवृत्तियों की ओर भी इशारा कर रही होती हैं। अभी हाल ही में एक खबर आई कि दिल्ली में तैनात सीबीएसई के संयुक्त निदेशक के तीनों बच्चे सफारी से हरदोई के अपने…