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पढ़े-लिखे लोगों के अपराध

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आज कल कोई भी अखबार उठा कर देखें आपको साइबर क्राइम की तमाम ख़बरें देखने को मिलेंगी लेकिन उनमें से कितनों में जांच पूरी होकर अभियुक्त पकड़े गए ये बात डीटेल में नहीं बताई जाती। हम–आप भी इन्हें सरसरी निगाह से देखकर भूल जाते हैं, लेकिन थोड़ा ठहर कर सोचिये तो ये समाज में नयी और निरंतर बढ़ रही प्रवृत्ति की ओर इशारा कर रही हैं। ज्यादा नहीं आज से करीब दशक भर पहले तक अपराध की प्रवृत्ति आमतौर पर पारम्परिक हुआ करती थी चोरी, डकैती हत्या वगैरह जिनके अभियुक्त भी अक्सर वारदात के आसपास के लोग ही होते थे जिनको पुलिस अपने मुखबिरों के संजाल की मदद से पकड़ कर जेल और फिर अदालत तक पहुंचा दिया करती थी।

एक बात और काबिल-ए-गौर है कि पारम्परिक अपराधों के अभियुक्त ज्यादातर कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ होते हैं आज भी। लेकिन समय निरंतर बदलता है सो अपराध की दुनिया भी बदल रही है, इस बदलाव के कई आयाम हैं साइबर क्राइम उनमें से एक है। करीब दो दशक पहले से सूचना क्रान्ति की बदौलत लोग तेज़ी से कम्प्यूटर दक्ष होने लगे, नतीजे में आज नौबत ये है कि अमेरिका जैसे अतिशय संपन्न और अफ्रीका के अतिशय विपन्न देशों में बहुतायत से एक जैसे कुशल कम्प्यूटर दक्ष और टेक्नो सेवी युवा भरे पड़े हैं। हर चीज़ के अच्छे और बुरे पहलू होते हैं उसी तरह सूचना क्रान्ति के भी हुए। तमाम दूसरे कारण और सूचना क्रान्ति की बदौलत ख़ासतौर से निर्धन देशों में बेरोजगारी बेइंतिहा बढ़ी है लेकिन कम्प्यूटर और मोबाइल युवा वर्ग को दुनिया भर की वे सब चीज़ें भी दिखा रहे हैं जो उनके भाग्य में नहीं हैं, इन वजहों को ही साइबर अपराध की मूल वजह समझिये।

साइबर क्राइम पूरी दुनिया में होते हैं लेकिन यूरोप और अमेरिका सूचना क्रान्ति के जनक हैं और संपन्न हैं इसलिए अपनी तकनीकी दक्षता की बदौलत उन्होंने इस तरह के अपराध पर काबू पाने में बेहतर सफलता पाई है लेकिन सामान्य देशों में ऐसा नहीं है। पेंडुलम की तरह इसके एकदम विपरीत स्थिति अतिशय विपन्न अफ़्रीकी देशों की है। वहां से साइबर अपराध पूरी दुनिया भर में किये जाते हैं और क़ानूनी जटिलताओं के चलते अपराधी अक्सर बच भी जाते हैं, इसीलिए अफ्रीका साइबर अपराध में अग्रणी है। लेकिन अपने यहाँ माहौल थोड़ा अलग है। ज्यादातर आबादी ग्रामीण और स्वाभाविक तौर पर शांति प्रिय है, लेकिन शहरों का माहौल दूसरा है।

शहरों में पढ़े लिखे और कम्प्यूटर दक्ष लोगों की एक ऐसी जमात तैयार हो चुकी है जिनके सपने बड़े हैं, जेब खाली और भविष्य अँधेरा। ऐसे में अगर वे खुराफाती या शातिर दिमाग हुए तो फिर साइबर अपराध की दुनिया उनको लुभाती है, रातोंरात लखपति या करोड़पति बन जाने की उत्तेजना उनसे ऐसे अपराध कराने लगती है। इनमें से अधिकाँश आदतन नहीं वरन परिस्थितिजन्य अपराधी होते हैं। इधर ऐसे अपराधों से निपटने वाले पुलिसिया तंत्र की भी अपनी सीमायें हैं। नई भर्तियों के बावजूद कम्प्यूटर दक्ष पुलिसकर्मी अभी भी अपने यहाँ कम हैं, अपराध की नई शाखा होने की वजह से कानूनी और अदालती प्रक्रिया में भी विसंगतियां मौजूद हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो फिलहाल अपराध के इस क्षेत्र में अपराधी पुलिस से आगे हैं। उम्मीद करें जल्दी ही पुलिस खुद को अपडेट कर यहाँ भी स्थिति उलट देगी।