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ब्रेकर के ज़रिए ठोकर खाते आप और हम

सत्ता छोटी से छोटी चीज़ में भी चाह ले तो प्रभुता और लघुता का अहसास करा ही देती है। शायद सत्ता का चरित्र ही ऐसा है। सड़कों पर बने स्पीड ब्रेकर जैसे छोटे निर्माण में भी सत्ता की यह प्रवृत्ति झलक ही जाती है। जहाँ प्रभुओं की रिहाइश होती है वहाँ…

अनटोल्ड ट्रैजेडी आफ स्ट्रीट डॉग्स…!!

हे देश के नीति-नियंताओं। जिम्मेदार पदों पर आसीन नेताओं व अफसरों ...आप सचमुच महान हो। जनसेवा में आप रात-दिन व्यस्त रहते हैं। इतना ज्यादा कि आप शुगर, ब्लड प्रेशर, थाइराइड आदि से परेशान रहते हैं। आप देश के खेवैया हो। राष्ट्र की यह नैया आपके…

इस्तीफा – उर्जित पटेल का, स्वेच्छा या मजबूरी?

यह महज़ एक इत्तेफाक नहीं है कि एक तरफ तो उर्जित पटेल के इस्तीफे और साथ ही दूसरी ओर तीन बड़े राज्यों में जनता द्वारा भी वृहद संख्या में भाजपा के खिलाफ मतदान दोनों घटनाओं ने केन्द्र में बैठी मोदी सरकार को यह संकेत दिया है कि जनता की आशाओं यथा…

डॉक्टरों की मार–पीट की वजह तलाशना बेहद ज़रूरी

किसी भी दिन का अखबार उठा कर देख लीजिये, अक्सर ये पढ़ने को मिल जाएगा कि किसी अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीजों को पीटा या मरीजों ने डॉक्टर को। इस को पढ़कर आपके दिमाग में डॉक्टर्स की बाबत नकारात्मक छवि बननी लाजिमी है, तभी आपके सामने कभी–कभी एक और…

जान है तो जहान है, ऐसी भी क्या जल्दी

ख़बरें टुकड़ों में आती हैं, इसलिए अक्सर इस ओर ध्यान नहीं जाता कि वे कई बार नई बन रही प्रवृत्तियों की ओर भी इशारा कर रही होती हैं। अभी हाल ही में एक खबर आई कि दिल्ली में तैनात सीबीएसई के संयुक्त निदेशक के तीनों बच्चे सफारी से हरदोई के अपने…

नित-नए पाठ्यक्रम और ठेके की नौकरियां

अभी थोड़े दिन हुए अखबार में खबर दिखी कि लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अपने यहाँ के तमाम सेल्फ फाइनांस कोर्सेज पढ़ाने बंद कर दिए और जो बचे हैं उनमें से अधिकाँश में पढ़ने के लिए विद्यार्थी नहीं आ रहे हैं। बात यहीं रुक जाती तो भी ग़नीमत थी। ख़बरें ये भी हैं…

बुखार को पहचानें, वर्ना फैल जाएगी महामारी

पहले काफी चलन में रही दीवार घड़ी के पेंडुलम की तरह, विपरीत ध्रुवों वाली, पुलिस विभाग से सम्बंधित दो ख़ास ख़बरें इधर हाल ही में आईं। एक बहुत चर्चित हुई, दूसरी की कोई चर्चा ही नहीं हुई, जबकि दोनों ही घटनाएं पुलिस विभाग में फैल रहे बुखार की सूचना…

वापस घर पहुँचने को ईश्वर की कृपा माने

कहावतें हमेशा गागर में सागर भरने वाली होती हैं, ऐसी ही एक कहावत है, जब कुएँ में भांग पड़ी हो तो फिर कुछ नहीं किया जा सकता। यह कहावत अपने शहर की यातायात व्यवस्था पर सटीक बैठती है। इसको बिगाड़ने के जितने भी सम्भव तरीके हैं, वो सब हमने आजमा डाले…

हाल-फिलहाल तो विश्वगुरु नहीं बनेगा भारत

मुग़ल बादशाह जहांगीर का दरबार सजा हुआ था और उसके सामने विनीत भाव से ब्रिटेन का दूत टॉमस रो खड़ा हुआ था, उसके पास सिर्फ दस मिनट का समय था, जिसमें उसे बादशाह को खुश कर भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार का लाइसेंस प्राप्त करना था। टॉमस रो के लिए ये…

व्यवस्था से खेलेंगे तो आप भी शिकार बनेंगे

कोई भी व्यवस्था मुकम्मल नहीं होती, तो भी उसको चलाने वालों का जोर सिस्टम से ही चलने पर होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि तब कमियां पाए जाने पर या ग़लतियाँ होने पर व्यवस्था के तहत उनको सुधारना आसान होता है। हाँ, यह ज़रूर है कि यह प्रक्रिया कभी – कभी…