The Golden Talk
by Anehas Shashwat

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देश जब आज़ाद हुआ तो उम्मीद और संभावनाओं से भरा हुआ था। उसी अतिरेकी दौर में ऐसा कहने वाले लोग भी थे कि अपना देश जल्दी ही फिर से विश्वगुरु बनेगा। हालांकि ऐसे लोग कम थे लेकिन थे, क्योंकि ज्यादातर को उन दिक्कतों का आभास था जिनसे देश तब रूबरू था और ऐसे में विश्वगुरु बनने का सपना देखना हास्यास्पद ज्यादा…
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