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हाल-फिलहाल तो विश्वगुरु नहीं बनेगा भारत

मुग़ल बादशाह जहांगीर का दरबार सजा हुआ था और उसके सामने विनीत भाव से ब्रिटेन का दूत टॉमस रो खड़ा हुआ था, उसके पास सिर्फ दस मिनट का समय था, जिसमें उसे बादशाह को खुश कर भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार का लाइसेंस प्राप्त करना था। टॉमस रो के लिए ये…

व्यवस्था से खेलेंगे तो आप भी शिकार बनेंगे

कोई भी व्यवस्था मुकम्मल नहीं होती, तो भी उसको चलाने वालों का जोर सिस्टम से ही चलने पर होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि तब कमियां पाए जाने पर या ग़लतियाँ होने पर व्यवस्था के तहत उनको सुधारना आसान होता है। हाँ, यह ज़रूर है कि यह प्रक्रिया कभी – कभी…

याद है किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज का बदला नाम?

स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी बड़े नेता थे, और देश के प्रधानमंत्री भी रहे, प्रधानमंत्री रहने के दौरान वे लखनऊ से सांसद रहे और शहर के लिए उन्होंने बहुत किया भी। इस नाते फ़र्ज़ बनता है कि लखनऊ में ऐसा कुछ किया जाए कि अटलजी की याद बनी रहे, यह सही…

शासकों की मानसिकता दर्शाती बटलर झील

लखनऊ के दिल हज़रतगंज के पास ही बटलर पैलेस कॉलोनी है। इस कॉलोनी की कहानी दिलचस्प है। पहले कहानी सुनिए फिर मतलब की बात होगी। नवाबी दौर में महमूदाबाद अवध की बड़ी रियासत थी। अंग्रेजों का ज़माना था और तब उत्तर प्रदेश वजूद में नहीं था। जो आज का…

लखनऊ को बेचिए, लेकिन ज़रा सलीके से

व्यवसाय के इस कलिकाल में सब कुछ बेच डालने का रिवाज़ है। पर्यटन भी ऐसी ही एक जिंस बनकर रह गया है, शायद इसीलिए जब पर्यटन व्यवस्था की सफलता को मापना होता है, तो कहा जाता है इतने करोड़ का बिज़नेस हुआ। यह नापने का कोई पैमाना नहीं बना कि पर्यटन से…

इन्हीं कन्धों पर है भारत को विश्वगुरु बनाने का बोझ

देश जब आज़ाद हुआ तो उम्मीद और संभावनाओं से भरा हुआ था। उसी अतिरेकी दौर में ऐसा कहने वाले लोग भी थे कि अपना देश जल्दी ही फिर से विश्वगुरु बनेगा। हालांकि ऐसे लोग कम थे लेकिन थे, क्योंकि ज्यादातर को उन दिक्कतों का आभास था जिनसे देश तब रूबरू था…

सत्यजित राय सी मेधा हो, तभी ऐतिहासिक फिल्म बनाएं

पद्मावत फिल्म जब चर्चा में थी और इस पर बहुत लिखा-पढ़ा जा रहा था,तभी मैंने सोचा था इस पर बाद में लिखूंगा | क्योंकि तब जो लोग भी उसको पढेंगे, वो शायद फिल्म देख भी चुके होंगे और तब वो बेहतर तरीके से मेरे लिखे को समझेंगे | ऐतिहासिक हिंदी फिल्में…

इल्तुतमिश ने रखा था, अकबर की महानता का आधार

हर व्यक्ति, संस्था, समाज और स्थान का अपना महत्व और इतिहास होता है। कई बार इतिहास इनके साथ न्याय नहीं भी करता। अक्सर यह अन्याय दरगुज़र हो जाता है, लेकिन कई बार यह अन्याय सोचने को मजबूर करता है‌। तेरहवीं शताब्दी में हुए गुलाम वंश के दूसरे…

नाकारा सरकारें और आत्महन्ता किसान

लाख दावों प्रति दावों के बावजूद आज भी भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खेती ही है। आधुनिक अर्थव्यस्था में इस स्थिति को पिछड़ेपन का द्योतक मानते हैं। बावजूद इसके अपने देश के किसानों ने देश के अनाज कोठार इस हदतक भर दिये हैं कि अगर तीन साल लगातार…

इतिहास में पाकिस्तान जोड़ेंगे, तभी बदलेगा भूगोल

अपने देश में किसी भी आदमी से पूछिए, मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने जामा मस्जिद कहाँ बनवाई? तत्काल जवाब मिलेगा दिल्ली में। शाहजहाँ ने एक और भव्य जामा मस्जिद सिंध के थट्टा इलाके में भी बनवाई। ध्यान रहे, शाहजहाँ के राज्य में न केवल आज का पाकिस्तान और…

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